लघुकथा - निरूत्तर
आसिया ने जैसे ही रात एक बजे घर में कदम रखा । तो वह अम्मी को सामने देख चौकं गई और बोली, क्या अम्मी आप अभी तक जाग रहीं हैं? दरवाजा तो अजीम भी खोल देता । जवान बेटी रात-रात भर घर से बाहर घूमे और माँ सुकून की नींद सोए यह कैसे हो सकता है । कभी कुछ ऊंच-नीच हो गई तो लोगों को क्या मुँह दिखाऊँगी । फराना गुस्सा होते हुए बोली ।
यह सुनकर आसिया का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। वह बोली, आप अम्मी ऐसी बातें कर रहीं हैं? आप खुद इतनी एडवांस हैं । आप हम दोनों भाई-बहन से छिप-छिप कर अपनी लाइफ को खूब एंजॉय करतीं हैं । लाज की सारी हदें लांघ कर अपने बाॅस की बाहों में पङी मजा लूटतीं हैं और हमें ऊँच-नीच सिखा रहीं हैं ।
इस तरह हैरान होने की जरूरत नहीं है हमें सब पता है । जब अपनी जिंदगी आप अपने तरीके से जी रहीं हैं, तो हमें भी अपनी जीने दीजिए इतने में अजीम भी अपने कमरे से बाहर आकर फराना पर बरस पङा ।
क्या जरूरत थी आपको अपने बाॅस के साथ नाजायज संबंध बनाने की आप शादी भी तो कर सकतीं थीं ? आपकी इस ओछी हरक़त की वजह से हमें अपने दोस्तों के सामने कितनी शर्मिंदगी उठानी पङती है। पता भी है आपको ?
यह सब सुनकर फराना खङी कि खङी ही रह गई वो अजीब निगाहों से अपने बच्चों का चेहरा देखने लगी जिस राज को वो सालों से छिपाए हुए थी । आखिरकार उनके बच्चे जान ही गए। जिन बच्चों को बोलना सिखाया था । सही-गलत की पहचान करना सिखाया था । आज उन्हीं बच्चों के सामने वह अपनी एक गलती के कारण फराना निरूत्तर खङी थी ।
- तरूण कुमार सावन।
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