दो शब्द दिल की कलम से
आज बहुत कोशिश करने पर भी कुछ लिख नहीं पाया । शायद अब लिखने के लिए बहुत कुछ है, बहुत कुछ में जो कुछ था लिखने के लिए वही कहीं खो गया है । कलम ने लिखने से इंकार कर दिया है , पृष्ठों से शब्दों ने दूरी बना ली है । मन अनमना है दिल कह रहा है लिख दूँ अपने प्रेम का इतिहास, दूरी की प्यास, कुछ छंद आस के विश्वास के । लेकिन जब आस के सूर्य से विश्वास के देवता मुँह फेर लें तो क्या रह जाता है , लिखने कहने के लिए। सिर्फ स्मृति के मानचित्र पर कुछ चित्र इतिहास के । जहाँ हास-परिहास है , कुछ सपने हैं , रूठने-मनाने के सिलसिले हैं, देर से आने के मौलिक बहाने हैं । उसके बाहर फिर वही आह , आँसू, विरह, वेदना के समंदर में डूबने तैरने की नीरस, उबाऊ प्यास। नींद, चैन, सुकून, सपने , उम्मीदें सब का एक साथ मर जाना । यह सब गिनाते हुए ऐसा लग रहा है जैसे कोई मरीज डॉक्टर को किसी बीमारी के लक्षण गिना रह हो । ( नींद नहीं आती है , भूख तो जैसे मर ही गई है ) कुछ लोग मानते भी हैं प्रेम एक बीमारी है । अगर बीमारी है तो इलाज है , इलाज है तो दवा भी होनी चाहिए। कोई हमें बताए तो सही , किसी प्रे...