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लघुकथा - निरूत्तर

आसिया ने जैसे ही रात एक बजे घर में कदम रखा । तो वह अम्मी को सामने देख चौकं गई और बोली, क्या अम्मी आप अभी तक जाग रहीं हैं? दरवाजा तो अजीम भी खोल देता । जवान बेटी रात-रात भर घर से बाहर घूमे और माँ सुकून की नींद सोए यह कैसे हो सकता है । कभी कुछ ऊंच-नीच हो गई तो लोगों को क्या मुँह दिखाऊँगी । फराना गुस्सा होते हुए बोली ।  यह सुनकर आसिया का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। वह बोली, आप अम्मी ऐसी बातें कर रहीं हैं? आप खुद इतनी एडवांस हैं । आप हम दोनों भाई-बहन से छिप-छिप कर अपनी लाइफ को खूब एंजॉय करतीं हैं । लाज की सारी हदें लांघ कर अपने बाॅस की बाहों में पङी मजा लूटतीं हैं और हमें ऊँच-नीच सिखा रहीं हैं । इस तरह हैरान होने की जरूरत नहीं है हमें सब पता है । जब अपनी जिंदगी आप अपने तरीके से जी रहीं हैं, तो हमें भी अपनी जीने दीजिए इतने में अजीम भी अपने कमरे से बाहर आकर फराना पर बरस पङा । क्या जरूरत थी आपको अपने बाॅस के साथ नाजायज संबंध बनाने की आप शादी भी तो कर सकतीं थीं ? आपकी इस ओछी हरक़त की वजह से हमें अपने दोस्तों के सामने कितनी शर्मिंदगी उठानी पङती है। पता भी है आपको ?  यह सब सुनकर फरा...

दो शब्द दिल की कलम से

आज बहुत कोशिश करने पर भी कुछ लिख नहीं पाया । शायद अब लिखने के लिए बहुत कुछ है, बहुत कुछ में जो कुछ था लिखने के लिए वही कहीं खो गया है । कलम ने लिखने से इंकार कर दिया है , पृष्ठों से शब्दों ने दूरी बना ली है । मन अनमना है दिल कह रहा है लिख दूँ अपने प्रेम का इतिहास, दूरी की प्यास, कुछ  छंद आस के विश्वास के । लेकिन जब आस के सूर्य से विश्वास के देवता मुँह फेर लें तो क्या रह जाता है , लिखने कहने के लिए।  सिर्फ स्मृति के मानचित्र पर कुछ चित्र इतिहास के । जहाँ हास-परिहास है , कुछ सपने हैं , रूठने-मनाने के सिलसिले हैं, देर से आने के मौलिक बहाने हैं । उसके बाहर फिर वही    आह , आँसू, विरह, वेदना के समंदर में डूबने तैरने की नीरस, उबाऊ प्यास। नींद, चैन, सुकून, सपने , उम्मीदें सब का एक साथ मर जाना । यह सब गिनाते हुए ऐसा लग रहा है जैसे कोई मरीज डॉक्टर को किसी बीमारी के लक्षण गिना रह हो । ( नींद नहीं आती है , भूख तो जैसे मर ही गई है )   कुछ लोग मानते भी हैं प्रेम एक बीमारी है । अगर बीमारी है तो इलाज है , इलाज है तो दवा भी होनी चाहिए।  कोई हमें बताए तो सही , किसी प्रे...